कल्याणरूप शिवतत्व

कल्याणरूप शिवतत्व

आनंदमय स्वरूपधारी शिव समस्त जग के कल्याणरूप शिवतत्व हैं। परात्पर सच्चिदानन्द परमेश्वर शिव एक हैं, विश्वातीत हैं और विश्वमय भी हैं। वे गुणातीत हैं, गुणमय हैं। वे एक होते हुए भी अनेक-अनेक रूप प्रकट कर कार्य कराते हैं। वे जब अपने विस्ताररहित अद्वितीय मूल स्वरूप में स्थित रहते हैं, तब मानो यह विविध विला...

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जगदगुरु शिव

जगदगुरु शिव

शिव ही जगदगुरु  हैं श्रीशिव के प्रति असंख्य प्राणियों की अगाध श्रद्धा इस बात का स्वतः ही परिचायक है कि वह समस्त कल्याण कारी व जगत पूजनीय हैं। श्रीशिव का एक बृहत परम् कल्याणकारी कार्य इस विश्व में शिव जगदगुरु के रूप में नाना प्रकार की विद्या योग, ज्ञान, भक्ति आदि का प्रचार करना है । जो उनकी कृपा क...

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वेदों में शिवतत्व

वेदों में शिवतत्व

शिवतत्व तो एक है ही है- ‘एकमेवाद्वितीयं ब्रह्मा’, उस अद्वय-तत्व के अतिरिक्त और कुछ है ही नहीं- ‘एकमेव सत्। नेह नानास्ति किंचन।’ किन्तु उस अद्वय तत्व के नाम अनेक होते हैं- ‘एक’ सद् विप्रा बहुधा वदन्ति।’ अर्थात उस अद्वय-तत्व को अनेक नामों से पुकारते हैं। शिव ही ब्रह्मा हैं- शवेताश्वतरोपनिशद के प्रा...

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लिंगमहापुराण और भगवान शिव

लिंगमहापुराण और भगवान शिव

लिंग पुराण में  शिव अविनाशी, परब्रह्मा, निर्दोष, सर्वसृष्टि के स्वामी, निर्गुण, अलख, ईश्वरों के भी ईश्वर, सर्वश्रेष्ठ, विश्वम्भर और सृष्टि के स्रष्टा, पालक व संहारकर्ता है। वे परब्रह्मा, परमात्मा आरै परज्योति हैं। विष्णु और ब्रह्मा उनसे पैदा हुए हैं। समस्त सृष्टि के आदि कारण शिव ही हैं। सभी भगवानों ...

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शिव और शक्ति

शिव और शक्ति

शिव शब्द का अर्थ है कल्याण और ‘शं का भी अर्थ है कल्याण तथा ‘कर का अर्थ है करने वाला, अर्थात शंकर। शिव, अद्वैत कल्याण, आनंद- ये सारे शब्द एक ही अर्थ के बोधक हैं। शिव ही ब्रह्मा है। ब्रह्मा ही शिव है। वही परब्रह्म अथवा परमतत्व है। इसी तत्व को संक्षेप में दर्शनशास्त्र, के तीन महान आदर्श- सत्यम्-शिवम्-स...

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वेदों मे शिवोपासना

वेदों मे शिवोपासना

वेदों मे शिवोपासना ‘जब प्रलयरूप समाधि मे न दिन था न रात्रि थी, न कार्य-कारण ही था, तब सब प्रकार के आवरण से रहित तुरीयस्वरूप एक शिव ही था।’ जब सब प्रपच अव्यक्त में लय हो जाता है और प्राणशक्ति निर्विशेष रूप से उमा में ओत-प्रोत होती है- कार्य कारण से रहित शव की तरह अनंत शक्तिमय शमशान में शयन करती है...

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शिव पुराण में शिवतत्व शिव पुराण में शिवतत्व

शिव पुराण में शिवतत्व शिव पुराण में शिवतत्व

देवों में देव महादेव सदाशिव भी हैं। प्रलय का अवसान होने पर पुन: सृष्टि के प्रारंभ पूर्व जब परब्रह्म सृष्टयुन्यमुख होते हैं, तब वे परमेश्वर(परात्पर) सदाशिव कहलाते हैं। वहीं सृष्टि के मूल कारण हैं मनुस्मृति में इन्हें ‘स्वयम्भू’ भी कहा है। तत: स्वयम्भूर्गवानव्यक्तो व्यंजयन्दिम्। महाभूतादि वृत्तौजा:...

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शिव तत्व रहस्य

शिव तत्व रहस्य

शंकर जी को जप करते देख पार्वती को आश्चर्य हुआ कि देवों के देव , महादेव भला किसका जप कर रहे हैं। पूछने पर महादेव ने कहा , ' विष्णुसहस्त्रनाम का। ' पार्वती ने कहा , इन हजार नामों को साधारण मनुष्य भला कैसे जपेंगे ? कोई एक नाम बनाइए , जो इन सहस्त्र नामों के बराबर हो और जपा जा सके। महादेव ने कहा- राम राम...

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